सीरिया में हो रहे हमलों के बाद दुनिया की दो महाशक्तियां फिर आमने-सामने है। सीरिया की असद सरकार के बचाव के लिए रूस ने अपना एक जंगी पोत भी सीरिया भेज दिया है। वहीं अमरीका सीरिया में विद्रोही ठिकानों पर हुए रासायनिक हमले के लिए रूस को ज़िम्मेदार ठहराया है। दुनिया की इन दो बड़ी शक्तियों के आमने-सामने आ जाने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा हैं कि क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध की ओर बढ़ रही है। अगर ऐसा है तो कौन देश किसके साथ होगा ये सवाल भी है।

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अमेरिका के साथ कौन-कौन से देश?
सीरिया में अमेरिका असद विरोधी समूहों के पक्ष में खड़ा हो गया था। अरब का मामला है तो उसके पक्ष में सबसे पहले खड़ा दिखता है इस्राइल, इसके अलावा नैटो के सहयोगी देश- ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी समेत कई देश अमेरिका के साथ हर अंतरराष्ट्रीय मामले पर साथ दिखते हैं। वहीं सीरिया का पड़ोसी देश तुर्की पहले से ही अमेरिका के साथ है। अमेरिका के सहयोगी Group-7 के सदस्य देशों की मीटिंग इटली में हो रही हैं। इस मीटिंग में इस बात पर चर्चा की जाएगी कि रूसी सरकार पर सीरियाई राष्ट्रपति बशर-अल-असद से दूरी बनाने का दबाव किस तरह बनाया जाए।

रूसी खेमे में कौन-कौन से देश शामिल
रूस, ईरान और सीरिया की सरकार अगले अमरीकी हवाई हमले की स्थिति में जवाब देने की मुद्रा में दिख रही है। अमेरिका बीते हफ्ते सीरिया के एयरबेस पर हमला कर चुका है। सीरियाई सरकार के मुख्य सैन्य सहयोगी रूस ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन करने वाली और मनगढ़ंत आधार पर की गई आक्रामक कार्रवाई बताया। रूसी सरकार के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोफ़ ने अमरीका और रूस के पहले से खस्ताहाल संबंधों के गंभीर रूप से बिगड़ने की चेतावनी दी। हालांकि, रूस की संसद ने कहा हैं कि अमरीकी कार्रवाई के बाद रूस अपने हमले तेज़ नहीं करेगा।

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